What is Hamsa Rajyog (हंस राजयोग) benefits and how to calculate

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Formation of Hamsa Rajyog
Hamsa Yoga forms with the divine Jupiter, when it occupies Kendra houses together with if it occupies signs – Cancer, Sagittarius or Pisces, then this gives the arise of Hamsa Yoga.
Jupiter signifies, wealth, expansion, education, guru, wisdom, learning, happiness, elegance, knowledge. Native with Hamsa Yoga are sweet voice, attractive courageous, honest, trust worthy, educated, virtuous and enjoys all types of material comforts and sensual desires.


Cancellation of Maha Purush Yoga
As per classical texts Mansagri, chapter 13, says The conjunction of the Yoga creating planets if conjoins with the Sun or Moon then Yoga gets nullified or becomes ineffective. Whereas there are some more other factors which gives cancellation of Mahapurusha Yoga, which are as follows:
Moon is in 6/8 position fromJupiter.Close contact with the Mercury/Rahu.Mutual aspect with the Mars. Jupiter is combust or Retro. If Yoga giving planet is combust or weak. If it is aspected by it’s deb…

ह्रदय रोग


ह्रदय रोग 

>> आज कल के खान पान रेहान सहन और दैनिक दिनचर्या के अस्त व्यस्त होने के कारण ह्रदय रोग की समस्या आम बात हो गई है
>> ह्रदय के करक गृह 
>> सूर्य ह्रदय करक गृह है
>> बुद्ध धमनियों का करक गृह है
>> गुरु वासा का करक गृह है
>> शनि और राहु धमनियों में रूखा पन व विकृति का गृह है
>> मंगल रक्त मांसपेशी का करक गृह है
>> चंद्र रक्त के सही भहाव का करक गृह है ब्लड प्रेशर इत्यादि 
>> लग्न स्वयं को दर्शाता है चतुर्थ भाव कालपुरुष कुंडली के ह्रदय का भाव है जो की हमारी छाती का भाग होता षष्ट भाव रोग को अष्टम भाव लंबे चलने वाले रोग को और द्वादश भाव हॉस्पिटल को चतुर्थ भाव को  और कारक गृह जब भी पीढित होंगे ह्रदय रोग की गणना की जा सकती है .चतुर्थ भाव भावेश पर पाप प्रभाव शनि राहु केतु इत्यादि या चथुर्थेश का संभंध 6,8,12 भाव से होगा और साथ में करक ग्रहों पर पाप प्रभाव होगा तो ह्रदय रोग होगा
>> ह्रदय रोग के प्रकार
>> धमनियों में ब्लॉकेज या अवरोध- गुरु ग्रह वसा के कारक है गुरु ग्रह का 6,8,12 भाव भावेशों से सम्बन्ध चतुर्थ भाव चतुर्थेश का पीड़ित होने पर धमनियों में अतिरिक्त वसा का जमाव होता है जिसके कारण ह्रदय हमारे जरूरी अंगों तक रक्त का संचार नहीं कर पता है
>> बुद्ध और शुक्र- शल्य चिकित्सा के कारक ग्रह हैं धमनियों में रूकावट खोलने के लिए स्टंट का प्रयोग किया जाता है स्टंट का काम अवरोध के स्थान पर जाकर अवरोध को हटाना या उस स्थान पर रक्त का सही प्रवाह बनाये रखना है ,जब बुद्ध का पाप ग्रसित होना और साथ में ह्रदय रोग के कुंडली में योग भी हों तो pacemaker मशीन लगती है पेसमेकर का काम ह्रदय को सुचारू रूप से धड़कने के लिए इस्तेमाल किया जाता है,शुक्र का शल्य चिकित्सा में योगदान ह्रदय की परत के रूप में है जब ह्रदय और धमनियों में रूखापन होता है तब धमनियों में रक्त जमने लगता है जिसे क्लोटिंग कहते हैं तब चिकित्सक खून को पतला करने की औषधि जैसे की एस्पिरिन लेने की सलाह देते हैं

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